बंद आँखों के अन्धयारो में
कुछ लम्हों के तोफें
सजाये थे मैंने
उन हसीन पलो को एक
बक्से में कैद कर
देना चाहा था मैंने
मेरे कुछ दबे ख्यालों
को बुनकर देना चाहा था मैंने
मेरे उन मचले ख्यालों को
पिरोया था उन बंद लिफाफों में
कुछ खुद के लिखे बोलो
को लिखा था, उन पन्नो में
दबे ख्वायिसों के तस्वीरों
को देना चाहा था मैंने
तेरे साथ बुने लम्हों को
बंद उन बक्सों में रखा था मैंने
तुझे तोफे में उन बक्सों
को देना चाहा था मैंने ,
इन लम्हों को अकेले
सजाया था मैंने

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