Tuesday, April 12, 2011

बंद बक्से में दबे लम्हें

बंद आँखों के अन्धयारो में 

कुछ लम्हों के तोफें 

सजाये थे मैंने 

उन हसीन पलो को एक

बक्से में कैद कर 

देना चाहा था मैंने 

मेरे कुछ दबे ख्यालों 

को बुनकर देना चाहा था मैंने 

मेरे उन मचले ख्यालों को 

पिरोया था उन बंद लिफाफों में 

कुछ खुद के लिखे बोलो 

को लिखा था, उन पन्नो में

दबे ख्वायिसों के तस्वीरों 

को देना चाहा था मैंने 

तेरे साथ बुने लम्हों को  

बंद उन बक्सों में रखा था मैंने 

तुझे तोफे में उन बक्सों 

को देना चाहा था मैंने ,

इन लम्हों को अकेले 

सजाया था मैंने 

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