Wednesday, January 12, 2011

ये साली ज़िन्दगी!!!

जितनी समेटने की कोसिस की 
उतनी बिखरती गई, ये साली ज़िन्दगी,
रेत की तरह मुट्ठी  से फिसलती चली गई/

यादों को जब पिरोने की कोसिस की 
तो बुँदे बनके बेह गयी,
ये साली ज़िन्दगी आगे निकल गयी,
बुँदे जो सुख गई तो मुस्कुराते हुए 
उन्हें पीछे छोड़  चल दी 
ये साली बेरहम ज़िन्दगी फिर आगे निकल गयी/

हर मोड़ पे यादों के पन्नो पे 
कुछ किरदार जुड़ गए, और 
कई अधुरी कहानी लिख गई,
कुछ हसीन मंजिलो और सपनो कि,
तो कुछ उन पीछे छुट गए रास्तो कि,
अन कही कहानी लिख गई,
ये साली ज़िन्दगी फिर आगे निकल गई/

रुक के आज देखा तो एहसास हुआ,
हमें कही दुर पीछे छोड़,
ये साली ज़िन्दगी बहुत आगे निकल गई/

5 comments:

vicious said...

that a very nice one ankesh ..keep writing :)

vicious said...

i hope this frustration is not related to your real life ..

Ankesh at Talk said...

@Vici

Thanx for the appreciating comment:-) Sadly ya this frustration is related to my real life... I wrote it while brooding into past memories, thoughts and what happened over the years... Last couple of years has been horrendous for me... But the best part is I am over most of that and Finally gathering myself well :)

Nishit said...

bahut badiya shayar sahab...

Ankesh at Talk said...

@Nishit.... Danyabad hujur... sahayr ki sahyri ko sarhahne ke liye :)