Wednesday, November 17, 2010

वो खोया सा "मै"

खोया सा महसूस होता है,

डर  भी बहुत लगता है,

आज उन पहचानी आँखों के बीच

"मै" सहमा सा  अनजान रहता है,

क्या जाने ऐसा  क्यों लगता है,

क्या "मै" को दिखावे से डर लगता है,

वो गुम होने  से क्यों आज  डरता है,

क्यों जानने वालो के बीच, वो 

अनजान बना घुमा करता है/

आलम ऐसा है, वो 

वो अनजानी आँखों की भीड़ में, "मै" होता है,

बिना नकाब के वो ,

बेखबर, मदमस्त "मै" होता है /

वो न किसी की ओर देखता है 

न किसी की नजर से वो सहमता है,

ना जाने इन अनजानों के बीच 

खुद को क्यों प् लेता है/

वो बस और बस "मै" होता है 

6 comments:

Dian Omkar said...

woh matlab kya hai?

Nishit said...

Jai ho ankesh baba ki...bhai scene kya...sab theek to hai na :)

Ankesh at Talk said...

@Dian... wo means that.. Like "That lost me"

Ankesh at Talk said...

@Nishit...Danyabad .. Sab thik maharaj bas ye to deep philosophy hai :)

MangoMan said...

Friggin awesome. Instant connect.

Ankesh at Talk said...

@vkg.. arre sab aap logo ki kirpa hai jo connect kar rahe hai hum... thanx sirji