Wednesday, November 18, 2009

नशे में डूबी एक शाम


ह्सीन शाम हो और
तेरा इंतजार हो, साथ में
शराब की एक जाम हो /
नशे में तेरी मुहब्बत का
एक नशीला ऐहशास हो /

तेरी जुल्फों के अंधेरे में
चांदनी रात हो /

नशे में गुनगुनाती शाम हो
और तेरे आने का इंतजार हो
तेरे आने से वो
पैमाने का हाथ से फिसलना
इस शराबी आशिक
के दिल का मचलना /

वो तेरे आवाज़ की मदहोशी
तेरे जुल्फों की अंगडाई
तेरी नशीली आँखों की बेचैनी
और इस आशिक की बेताबी....


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2 comments:

Bunty said...

aay haay ustaad!!

ANKESH said...

dhanyabad hujur... :-)