Saturday, February 7, 2009

उलझने



जीवन एक पहेली बन गई है ,


एक भुलभुलईया बन गई है ,


हर एक मोड कई नये सवाल बन गई है ,


हर एक मोड कई नये रास्ते दिखलाती है ,


हर एक रास्ता कई मंजिलो का शबब बन गई है ,


हर एक मंजिल नये आयाम पर ले जा सकती है ,


हर एक मंजिल गहरी खाई का डर भी जगाती है /


जीवन कई अन सुलझे सवाल बन गई है,


हर एक सवाल अपने को सुलझाने को कहती है।


जीवन की ये पेचीदगी ,


हर पल नये उलझाने खड़ी कर रही है,


इन उलझनों को सुलझाने में,


मासुमियत कही खो सी जा रही है,


ये हर एक मासूम से जीवल की सरलता छीन रही है/


जीवन का हर एक नया पायेदान ,


और भी बिचलित करती है,


ये और भी नये अनसुलझे सवाल खडे करती है/


1 comment:

Nishit said...

ye to sach hai ki jivan ek bahut badi uljhan ya paheli hai...ise jitna suljhao utna ulajhti hai...isiliye follow bagga's theory....ENJOYYY